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TCS AI Hiring: एआई पर बड़ा दांव, हजारों फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स की होगी भर्ती, जानिए क्या है FDE

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Alam Ki Khabar | टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बड़ा दांव खेलते हुए हजारों फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स (FDE) की भर्ती की तैयारी कर रही है। जानिए FDE क्या होते हैं और आईटी उद्योग में इनकी मांग क्यों तेजी से बढ़ रही है।

नई दिल्ली, 13 जुलाई।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शामिल टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने नई तकनीकी जरूरतों के अनुरूप अपनी कार्य रणनीति में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। कंपनी अब हजारों फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स (FDE) की भर्ती की तैयारी कर रही है। इन इंजीनियरों का मुख्य काम ग्राहकों की जरूरत के अनुसार एआई तकनीक को उनके मौजूदा सिस्टम, डेटा और कारोबारी प्रक्रियाओं के साथ जोड़ना होगा। कंपनी का मानना है कि भविष्य में केवल एआई टूल बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. कृतिवासन के अनुसार कंपनी अपने कुल कार्यबल का लगभग एक से डेढ़ प्रतिशत हिस्सा FDE की भूमिका में विकसित करना चाहती है। मौजूदा कर्मचारी संख्या को देखते हुए यह संख्या लगभग 5,900 से 8,900 इंजीनियरों तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही कंपनी साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और एआई क्षेत्र में नई तकनीकी कंपनियों के अधिग्रहण की संभावनाओं पर भी काम कर रही है।

फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर ऐसे विशेषज्ञ होते हैं जो सीधे ग्राहक के साथ काम करते हैं। उनका उद्देश्य किसी संस्थान की मौजूदा तकनीकी व्यवस्था को समझकर उसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान लागू करना होता है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई बैंक ग्राहक सेवा को बेहतर बनाने के लिए एआई अपनाना चाहता है तो FDE पहले उसके सॉफ्टवेयर, डेटा और कार्यप्रणाली का अध्ययन करेगा और फिर उसी के अनुरूप एआई सिस्टम को सफलतापूर्वक स्थापित करेगा।

वैश्विक स्तर पर इस पद की मांग तेजी से बढ़ रही है। तकनीकी कंपनियां ऐसे विशेषज्ञों को आकर्षक वेतन और बेहतर करियर अवसर प्रदान कर रही हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित सेवाओं के विस्तार के साथ FDE की भूमिका आईटी उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण नौकरियों में शामिल हो सकती है।

टीसीएस का मानना है कि भारतीय आईटी कंपनियों को ग्राहकों के सिस्टम के साथ लंबे समय से काम करने का अनुभव है, इसलिए एआई इंटीग्रेशन के क्षेत्र में उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है। कंपनी के अनुसार भविष्य में सफलता केवल कम लागत पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि ऐसे प्रशिक्षित विशेषज्ञों पर आधारित होगी जो ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों को समझकर प्रभावी समाधान उपलब्ध करा सकें।

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई के कारण आईटी उद्योग में बदलाव जरूर आ रहा है, लेकिन इससे रोजगार पूरी तरह खत्म नहीं होंगे। इसके बजाय नई तकनीक के अनुरूप नए प्रकार की नौकरियां तेजी से विकसित होंगी और तकनीकी कौशल रखने वाले युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे।

एआई के साथ बदल रही रोजगार की तस्वीर

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में केवल प्रोग्रामिंग जानना पर्याप्त नहीं होगा। एआई, डेटा, साइबर सुरक्षा और बिजनेस इंटीग्रेशन जैसी नई क्षमताओं वाले इंजीनियरों की मांग लगातार बढ़ेगी। ऐसे में युवाओं को नई तकनीकों के अनुरूप खुद को तैयार करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

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